सीएम धामी ने स्थलीय निरीक्षण कर श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु प्रशासन द्वारा की गयी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होने श्रद्धालुओं की समस्याएं सुनी। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य एवं व्यवस्थाएं सामान्य रहने पर ऑफलाइन पंजीकरण संख्या को बढ़ाया जायेगा।

सीएम धामी ने ऋषिकुल मैदान, हरिद्वार में संचालित हो रहे चार धाम यात्रा पंजीकरण केन्द्र का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पंजीकरण हेतु पहुंचे श्रद्धालुओं से बातचीत कर व्यवस्थाओं के प्रति उनके विचार जाने। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के हित में पंजीकरण काउंटर बढ़ाये जाने की आवश्यकता होने पर जरूरत के हिसाब से काउंटर बढ़ने एवं श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शौचालय के साथ कूलर आदि की व्यवस्था करने तथा सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा कर्मी तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए, कि किसी भी श्रद्धालु के साथ फ्रॉड न हो, यदि किसी भी श्रद्धालु के साथ फ्रॉड होता है तो फ्रॉड करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाए तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर आवश्यक कदम उठाये जाएं।

‘चारधाम यात्रा प्रदेश की लाइफलाइन’

उन्होंने कहा कि विगत दिनों चार धाम यात्रा के दौरान अधिक संख्या के कारण ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को कुछ समय के लिए बन्द किया गया था, जिसे अब खोल दिया गया है। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य एवं व्यवस्थाएं सामान्य रहने पर ऑफलाइन पंजीकरण संख्या को बढ़ाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपेक्षा की है कि उन्हें चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन के अनुसार जो तिथि मिली है, उसके अनुसार ही दर्शन के लिए आएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रदेश की लाइफलाइन है। यह यात्रा राज्य की आर्थिकी से भी जुड़ी है। जिस तेजी से चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है, हम सबका दायित्व है कि यात्रा को सुगम और सरल बनाने में सभी मिलकर सहयोगी बनें।

जल संरक्षण एवं पौधरोपण अभियान की करेंगे समीक्षा

बता दें की सीएम धामी प्रदेश में जल संरक्षण एवं पौधरोपण अभियान की बुधवार को समीक्षा करेंगे। यह बैठक सचिवालय स्थित विश्वकर्मा भवन के पंचम तल स्थित सभागार में होगी। बैठक में सूख रहे जल स्रोतों एवं वर्षा आधारित नदियों को चिह्नित कर उपचार के लिए समग्र कार्ययोजना बनाकर अंतर विभागीय समन्वय पर चर्चा करेंगे। बैठक में पर्यावरण क्षेत्र में सक्रिय स्वयं सेवी संस्थाओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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