एक अनोखी शादी का अद्भुत नजारा, उत्तराखंड के हल्द्वानी में हर्षिका पंत ने भगवान श्रीकृष्ण से विवाह रचा लिया। हर्षिका ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मानकर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनसे शादी की।

300 से अधिक बाराती रहे मौजूद

बुधवार को मुरली मनोहर संग उनके विवाह के मांगलिक कार्य शुरू हुए। वहीं गुरुवार को गाजेबाजे के साथ बरात आई और उनकी शादी रस्में पूरी हुई। बैंड बाजे की धुन और 300 से अधिक बरातियों की मौजूदगी में हर्षिका ने श्रीकृष्ण की मूर्ति से विवाह किया। हल्द्वानी के आरटीओ रोड स्थिति इंद्रप्रस्थ कालोनी फेज तीन निवासी पूरन चंद्र पंत की पुत्री हर्षिका दिव्यांग हैं।

9 इंच की भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति

वहीं इस विवाह की तैयारियां छह माह से चल रही थीं। उनके पिता पूरन चंद्र पंत ने बेटी के विवाह के लिए वृंदावन में निमंत्रण भेजा और वहां से नौ इंच की भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति तीन जुलाई को धूमधाम से उनके घर पहुंची। बुधवार महिला संगीत कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस विवाह में 300 से अधिक लोगों को निमंत्रण भेजा गया। दो पंडितों ने विवाह कराया।

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कान्हा के लिए करवाचौथ का व्रत

मूल रूप से बागेश्वर के रहने वाले पूरन चंद्र पंत वर्ष 2020 से हल्द्वानी में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि बेटी बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण की भक्त हैं। जब वह आठ वर्ष की थी तो उसे स्वप्न में कान्हा के दर्शन हुए और उसने यह बात अपनी माता मीनाक्षी पंत के साथ साझा की। तभी से उसका आकर्षण मुरली मनोहर की ओर हुआ। वह जब 10 वर्ष की हुई तो कान्हा के लिए करवाचौथ का व्रत रखना प्रारंभ किया और तब से प्रतिवर्ष व्रत रखती हैं।

प्रभु के प्रति आकर्षण के बीच हर्षिका ने कान्हा संग विवाह की बात कही। बेटी की इच्छा और भक्ति को देख स्वजन भी राजी हो गए। पूरन पंत ने बताया कि पुरोहित से विधान पूछने पर उन्होंने वृंदावन में विवाह कार्य होने की जानकारी दी। यद्यपि वहां जाकर कार्यक्रम करना संभव नहीं था तो स्वजन एक जुलाई को प्रेम मंदिर वृंदावन गए। वहां भगवान के नाम कार्ड दिया और प्रक्रिया सम्पन्न करवा कर श्रीकृष्ण की प्रतिमा लेकर तीन जुलाई को हल्द्वानी पहुंचे।

पैरालाइज्ड पिता के ठीक होने के बाद बड़ी श्रद्धा

हर्षिका के पिता पूरन चंद्र पंत ने बताया कि उन्हें वर्ष 2020 में अटैक पड़ा था और शरीर पैरालाइज हो गया। ऐसे में 10 से 15 दिन तक बेहोश रहे। उसके बाद उन्हें होश आया तो बेटी ने कहा कि उनके कान्हा जी ने उन्हें ठीक कर दिया है। इसी के बाद से प्रभु के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। बताया कि उनका अभी भी उपचार चल रहा है।

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