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देहरादून से कारतूसों  की तस्करी, 1975 नग 12 बोर के कारतूस मेरठ में पुलिस ने पकड़े

देहरादून से उत्तरप्रदेश जा रहे कारतूस से भरे जत्थे को मेरठ में यूपी एसटीएफ ने जब्त कर लिया। बताया जा रहा है यह कारतूस इटली में बने हुए थे जिनकी संख्या लगभग 1975 थी।

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यूपी एसटीएफ की मेरठ इकाई ने कुल 1975 नग 12 बोर के कारतूस जब्त किए हैं। कारतूस देहरादून के राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग स्पोर्ट्स (आर.आई.एस.एस.) से तस्करी करके मेरठ में एक खरीदार को भेजे जा रहे थे। कूरियर राशिद अली, जिसे अब पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में रशीद अली ने बताया कि आरआईएसएस में यह कारतूस शूटिंग खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण हेतु मंगवाए गए थे। रशीद  अली के बयान पर एसटीफ ने आरआईएसएस के संचालक सुभाष राणा ओर उसके साथी सक्षम को भी आरोपित बनाया है।

आपको बता दें सुभाष राणा पद्मश्री जसपाल राणा के छोटे भाई है एवं सुभाष  को स्वयं द्रोणाचार्य समान प्राप्त है। हालांकि संचालक सुभाष राणा ने कारतूसों  की तस्करी से अनभिज्ञता जताई हैं और बताया कि उनकी अकादमी का यह नाम नहीं है।

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एसटीएफ एएसपी ब्रिजेश सिंह ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है कि यह कारतूस मेरठ में किसे सप्लाई किए जाने थे और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार राशिद अली लंबे समय से इस धंधे में संलिप्त था। इससे पहले भी कई बार हथियार और कारतूसों की खेप डिलीवर कर चुका था।

फिलहाल, एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि वह अब तक कितनी बार इस तरह की तस्करी कर चुका है और किन-किन राज्यों में इसकी सप्लाई हो रही थी। एसटीएफ की टीम इस पूरे गिरोह की जानकारी एकत्र कर उनकी घेराबंदी करने में जुट गई है।

 

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